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zameen ki registry kaise karwaye in hindi|how to registry of land| plot/zameen /प्रॉपर्टी खरीदते समय सावधानियां/how to registry full guide



zameen ki registry kaise karwaye in hindi|how to registry of land| plot/zameen /प्रॉपर्टी खरीदते समय सावधानियां|how to registry full guide

zameen ki registry kaise karwaye in hindi|how to registry of land| plot/zameen /प्रॉपर्टी खरीदते समय सावधानियां/how to registry full guide
आज महंगाई के जमाने में कोई प्लॉट या जमीन  खरीदना बहुत ही महंगा हो गया है जब हम कोई प्लाट खरीदते हैं घर या दुकान बनाने के लिए तथा तो हमें पूरी जानकारी ना होने पर बहुत ज्यादा नुकसान होने का खतरा रहता है क्योंकि आजकल बहुत ही ज्यादा धोखेबाजी  हो गई है और हमारी मेहनत का पैसा हमारी जिंदगी भर की मेहनत की कमाई पल भर में  साफ हो जाती है इसलिए  धोखा ना हो  हम पूरी जानकारी देंगे कोई भी प्लॉट या जमीन खरीदने से उस जमीन या प्लाट पर कंस्ट्रक्शन कराने तक का पूरा तरीका बताएंगे और रजिस्ट्री कैसे होती हैऔर क्या डॉक्यूमेंट लगते हैं क्या सावधानियां रखनी चाहिए  आईए जानिए  

zameen ki registry kaise karwaye in hindi|how to registry of land| plot/zameen /प्रॉपर्टी खरीदते समय सावधानियां|how to registry full guide

#1 Search plot:-

प्रॉपर्टी खरीदने के लिए सबसे पहला और मुख्य काम है अपनी मनपसंद लोकेशन पर प्लॉट या जमीन खरीदना इसके लिए आप सबसे पहले आपको जो लोकेशन पसंद है उस पर प्लॉट देखें प्लॉट खरीदने के लिए आप या तो डायरेक्ट ओनर से मिल सकते हैं या फिर आप कोई प्रॉपर्टी डीलर की मदद ले सकते हैं यदि आप किसी अनरसे डायरेक्ट मिलते हैं तो जमीन या प्लॉट सस्ता पड़ जाता है यदि आप प्रॉपर्टी डीलर की सहायता से प्लॉट्स खरीदते हैं तो प्रॉपर्टी डीलर अपना कमीशन प्रॉपर्टी की कीमत के हिसाब से लेता है इसलिए थोड़ा महंगा पड़ जाता है

#2 Enquiry of plot (
प्लॉट की वेरीफिकेशन अथवा इंक्वायरी):-

हम जो भी प्लॉट खरीद रहे हैं सबसे पहले हमें यह ध्यान देना चाहिए कि उस प्लॉट पर कोई झगड़ा या कोई विवाद तो नहीं है इसके लिए आप रजिस्ट्री ऑफिस में वेरीफिकेशन कर सकते हैं या फिर आप ओनर से इस प्रॉपर्टी के नक्शा ले सकते हैं यदि वह ऑनर नहीं है तो पावर ऑफ अटार्नी देख सकते हैं यदि हम प्रॉपर्टी डीलर की सहायता से खरीदते हैं तो अधिकतर प्रॉपर्टी डीलर जानते हैं कि यह विवादास्पद हैअथवा  यह सही प्रॉपर्टी है इसलिए हमें प्रॉपर्टी डीलर के द्वारा  ही प्रॉपर्टी खरीदनी चाहिए 

#3 payment(जमीन का भुगतान):- 

हमेशा जमीन का भुगतान करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि हमें पूरा पैसा एक बार में नहीं देना है  और हमेशा यह ध्यान रखना चाहिए कि हम जो भी पेमेंट कर रहे हैं वह या तो चेक से होना चाहिए या फिर नेट बैंकिंग के द्वारा  होना चाहिए  ऐसा इसलिए क्योंकि नेट बैंकिंग अथवा चेक में यह  पता पड़ जाता है कि यह कहां पर transaction (ट्रांजैक्शन) हुआ है किस अकाउंट में पैसा डाला गया है किसके लिए पेमेंट हुआ है हमें हमेशा डायरेक्ट कैश देने से बचना चाहिए 

#4 Documents(जमीन के डॉक्यूमेंट):-

प्रॉपर्टी खरीदते समय हमें दो गवाहों के सिग्नेचर करवाने चाहिए वह कोई धोखेबाजी में सबूत के तौर पर काम आते हैं इसलिए हमें एफिडेविट तैयार करवा लेना चाहिए प्लॉट की नकल प्लॉट खरीदने वाले के आईडी प्रूफऔर फोटो   प्लॉट बेचने वाले केआईडी प्रूफ  और फोटो दो गवाहों केआईडी प्रूफ और एफिडेविट ,खरीदने वाले व्यक्ति का प्लॉट के  अंदर खड़ा होकर फोटो खिंचवाना पड़ता है 
#5 Advocate hire(वकील हायर करना):-

प्रॉपर्टी के पूरे डॉक्यूमेंट तैयार करवाने के लिए हमें सबसे पहले एक वकील को हायर करना चाहिए अपनी जरूरत के हिसाब से हम कोई भी वकील हायर कर सकते हैं वकील को प्रॉपर्टी के कागज बनाने में लगभग 2 से 3 घंटे तक लग जाते हैं  क्योंकि प्रॉपर्टी के कागज बनाने तथा उस पर स्टांप ड्यूटी चिपकाने के लिए वकील हायर करना अति आवश्यक है वकील सरकारी ड्यूटी के हिसाब से स्टांप लगाता  है जैसे हमने कोई प्लॉट 15लाख  रुपए में खरीदा  और हमारे द्वारा  सरकार को उसकी रेट 11लाख में सौदा बताया है तब सरकारी ड्यूटी फीस ₹11लाख  पर माना ₹58000 लगी अर्थात सरकारी स्टांप ₹58000 के लगे  है अलग-अलग स्टेट में अलग-अलग सरकारी फीस लगती है अर्थात स्टांप की ड्यूटी फीस अलग अलग होती है वैसे तो सरकारी फीस लगभग 3 %,4%  अधिकतम 8 % तक लग जाती है

#5 Registry office(रजिस्ट्री ऑफिस):-

अब हमें रजिस्ट्रार ऑफिस जाना पड़ता है उसके बाद  खरीदने वाले और बेचने वाले को रजिस्ट्री ऑफिस जाने और रजिस्ट्री करवाने के लिए एक दिन  फिक्स कर लेना  चाहिए और उस दिन हम रजिस्ट्री ऑफिस जाएं और वहां खरीदने वाले बेचने वाले और जो गवाह है उनको साथ ले जाकर रजिस्ट्री ऑफिस में जाते हैं वहां पर रजिस्ट्रार द्वारा वेरीफिकेशन की जाती है खरीदने बाले और बेचने वाले दोनों की रजामंदी तथा गवाहों की रजामंदी सब कुछ सही होने पर उसको वेरिफिकेशन करते हैं तथा आगे उसका फिंगरप्रिंट तथा आंखों को स्कैन किया जाता है जिससे कोई धोखेबाजी नहीं हो पाए और हमें कुछ समय बाद अपनी जमीन या प्लॉट के ओरिजिनल पेपर मिल जाते हैं और इस प्रकार हम कोई भी जमीन खरीद लेते हैं और हम उस जमीन के मालिक हो जाते हैं ऐसा कोई भी जमीन खरीदने का पूरा प्रोसेस
जमीन पर कंस्ट्रक्शन कराने के लिए प्रक्रिया 

जब हम अपनी जमीन पर कोई कंस्ट्रक्शन कराना चाहते हैं या कोई बिल्डिंग खड़ी करना चाहते हैं तो हमें सबसे पहले एक फॉर्म फिल करना पड़ता है हमें नगर पालिका में उस फॉर्म को जमा कराना पड़ता है एफिडेविट भी लगाना पड़ता है और उसके बाद में नगर पालिका द्वारा प्लॉट को वेरीफाई करने के लिए एक ऑफिसर हमारी जमीन अथवा प्लॉट को देखने के लिए भेजा जाता है  उसके बाद वेरीफिकेशन सही होने पर हमें कंस्ट्रक्शन कराने के लिए अनुमति प्रदान कर दी जाती है और  हम कोई भी कंस्ट्रक्शन करा सकते हैं 

प्रॉपर्टी खरीदते समय सावधानियां :-


# जमीन खरीदने से पहले हमें उसका पूरा वेरीफिकेशन रजिस्ट्रार ऑफिस में कर लेनी चाहिए हॉनर उस जमीन के दस्तावेज जांच लेने चाहिए उसने वह नकली दस्तावेज तो नहीं दिए हैं 

#पहले तो हमें यह जांच कर लेना चाहिए कि जो हम जमीन खरीद रहे हैं उस पर कोई बैंक का लोन बाकी तो नहीं रह गया है 

#जमीन खरीदते वक्त में यह जरूर देख लेना चाहिए कि वह जमीन विवादास्पद तो नहीं है 

#जमीन खरीदते वक्त में यह ध्यान रखना चाहिए कि वह वास्तु के हिसाब से सही है या नहीं 

#यदि आप  सामूहिक सोसाइटी में कोई जमीन खरीद रहे हैं तो उसके लिए हमें एनओसी शेयर सर्टिफिकेट तथा आप जो  जमीन खरीद रहे हैं तो वहां के विकास अधिकारी से जोनल सर्टिफिकेट के लिए आवेदन करें और हमें यह पता करना आवश्यक है कि वह रेजिडेंशियल जोन में है या नहीं या फिर वह इंडस्ट्रियल जोन में तो नहीं है यदि इंडस्ट्रियल जोन में है तो उस प्रॉपर्टी को बिल्कुल भी ना खरीदें क्योंकि इंडस्ट्रियल जोन में रेजिडेंशियल इमारत या भवन निर्माण नहीं करा सकते क्योंकि वह अवैध होता है 

#जब हम कोई जमीन प्लॉट खरीद रहे हैं तो यह भी सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि वह ग्रीन बेल्ट में तो नहीं है क्योंकि कृषि वाली जमीन पर हम कोई भी भवन निर्माण अवैध माना जाता है यदि भूमि कृषि क्षेत्र में है तो उसे हमें गैर कृषि क्षेत्र में परिवर्तित करवाना पड़ता है अर्थात हमें उसका कन्वर्जन करवाना पड़ता है इसके लिए हमें तहसीलदार तथा अन्य अधिकारियों के ऑर्डर हासिल करने के लिए आवेदन करना पड़ता है खासकर सोसायटी समूह में अर्थात वह जो जमीन हम खरीद रहे हैं वह गैर कृषि क्षेत्र में होनी चाहिए 

#पेमेंट हमेशा हमें चेक या नेट बैंकिंग से करना चाहिए क्योंकि ट्रांसलेशन सिलेब से हमें कोई भी धोखेबाजी होने पर सहूलियत रहती है 
दोस्तों यह था पूरी प्रक्रिया कोई भी जमीन खरीदने से लेकर उस पर कंस्ट्रक्शन कराने तक का पूरा प्रोसेस

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