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फिटनेस तंत्र मंत्र  जंत्र

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how make fit body



आज के समय का सबसे लुभावना आकर्षक शब्द फिटनेस है ।अगर मनुष्य   फिट है  तो उसके  हिट होने  में  आधा ही प्रयास कामयाब  हो जाएगा   । आज के समय फिट दिखना जितना महत्वपूर्ण है । उतना बुद्धिमान बलशाली होना नहीं है । क्योंकि आज की दुनिया मैं लोग फिट शरीर  की तगड़ी मार्केटिंग कर रहे हैं ।अगर लड़की लड़के फिट हैं तो उन्हें मॉडल नाटकों के फिल्मों के बेहतरीन कार्य आसानी से मिल जाते हैं । योग्यता की परख तो बाद में होती है अनेको कार्य जैसे  खिलाड़ी योग शिक्षक अनेक प्रकार सुरक्षा गार्ड एवम सैनिक सिपाही कई प्रकार के कार्य आसानी से मिल जाते हैं । पुरातन  काल यानी पुराने समय ही से हमेशा से ही अच्छे स्वास्थ्य को खराब स्वास्थ्य के व्यक्ति के ऊपर वरीयता दी गई ।अच्छे स्वास्थ्य  वाले लोगों को  खास जगह समाज ने प्रदान की ।तथा सभी नागरिक स्वस्थ हों ऐसी  कामना भी की गई थी । सर्वे भवन्तु सुखिना सर्वे संतु निरामया ।लेकिन अच्छे स्वास्थ्य वाले लोग समाज को उपहार रूप हुआ करते थे ।वे समाज सेवा और   समाज हित में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते थे । आजकल यह भावना न्यून हो  गयी है । लुप्तप्राय होती जारही है व्यक्तिवादी होती सोच के साथ मंनुष्य की धन लोलुपता जिसका उद्देश्य  अर्थ कमाना ही  है  । यही मनुष्य जीवन का  उद्देश्य हो गया है । भोगवादी व्यवस्था शरीर के इर्द गिर्द घूमती है । इसलिए आज के युग के केंद्र में यही हैं व्यक्ति के गुणों की कद्र कम होती जा रही है । जो जितनी मार्केटिंग कर सकता है वह उतना ही सफल है । चाहे क्षेत्र कोई हो ।

 मार्केटिंग की पहली सीढ़ी शरीर की फिटनेस ही है ।अच्छे स्वास्थ्य  का अर्थ प्राणी का निरोग होना किसी भी प्रकार की व्याधि शरीर में नही होना होता है । इसके अलावा शरीर बल बुद्धि से युक्त होना भी माना गया था । लेकिन आज जिस फिटनेस की बात करते हैं उसमें शरीर चर्बी रहित होना चाहिए । चाहे  आपका बदन इकहरा ही हो। एक दुबला पतला लड़का लड़की को फिट मानते हैं ।उनका आशय उनकी सामर्थ से बिल्कुल नहीं है ।यह फिटनेस की विसंगति है । यह उसका अधूरा पन है ।फिटनेस स्वास्थ का पूरक शब्द है लेकिन यह इसका समानार्थी शब्द नहीं है । स्वास्थ सम्पूर्ण हेल्थ का प्रतीक है ।जिसमें तन के साथ मन बुद्धि बल सब का श्रेष्ठ  होता है।आज कल भारत में विसंगति स्वरूप एक नया चलन देखने मैँ आ रहा है । लड़के लड़कियों ने खाना छोड़ रखा है । क्योंकि अच्छे स्वास्थ्य वाली लड़की से लड़के विवाह नहीं करना चाहते हैं। कैसी बिडम्बना है यह। पूरी तरह भौतिकवाद में डूबे लड़की लडके बिना गुणों को जाने बिना चरित्र को परखे आपस में जुड़ जाते हैं ।लेकिन थोड़े समय में ही अलगाव की ओर चल पड़ते हैं ।यह सब सम्पूर्ण स्वास्थ का न होने के कारण होता है । यह केवल फिट होने से नहीं हो सकता है। व्यकितत्व का विकास में तन के साथ साथ मन का विकास भी अवश्य होना चाहिए ।यही फिटनेस का उत्कृष्ट रूप है ।सम्पूर्ण स्वस्थ व्यक्ति सहनशील बुद्धिमान बलवान विवेकशील जागरूक होता है । आओ फिटनेस के सम्पूर्ण पक्षों को विचार करते हैं । इस अत्यावश्यक फिटनेस को कैसे प्राप्त करे  । कैसे बनाये रखें ।

यहां पर तंत्र मंत्र जंत्र तीनो का विस्तार से आपको बताया जा रहा है । मंनुष्य प्रजाति की मंगल कामनाओं के साथ सादर पठन और अपनाकर  सम्पूर्ण स्वास्थ प्राप्ति ही सहजता से प्राप्ति हेतु समर्पित  हैं ।
 Fitness tantra  ( फिटनेस तंत्र )
#तंत्र :-

फिटनेस बनाये रखने के लिए आजकल मशीन युग में मशीनों का एक जखीरा उपलब्ध है । यही तंत्र है या यों कहो स्वास्थ के लिए उपलब्ध साधन उपकरण हैं ।इसका  नया नाम  जिम है जिसमें बिभिन्न तंत्र उपकरणों से आपके शरीर को फिट रखा जाता है ।
इसमें लोग एक अपने अनुसार अच्छा पैकेज  लेते हैंपैकेज का अर्थ जिम के मालिक को मासिक कुछ पैसे देने होते हैं ।वहां अच्छे से एयर कंडीशन कक्षों में मशीनों को चलाते हैं ।और अपनी कैलोरी को नष्ट करते हैं खर्च करते हैं  ।जिससे शरीर की चर्बी कम होती है । यह फिटनेस तंत्र पहले जो कसरत लोग बाग बगीचों में करते थे । जहां हवा पानी सब मुफ्त था free था ।उसीकार्य को पैसे देकर करते हैं । और बन्द ऐरकंडिशनएडकमरे में  करते हैं ।यह तरीका भी मनुष्य के लिए प्रभावी है । इसमें हम अपनी ऊर्जा को  काम लेकर दुष्प्रभावी  होने से बच जाते हैं ।इससे हमारी शारीरिक संगठनाबनी रहती है ।हम फिट बने रहते हैं । इसके रोज करने हमारी फिटनेस बनी रहती है । ये तंत्र या साधन शरीर के बेडौलपन को भी फिट बनाते है । इनके प्रयोग के साथ खाने पर कंट्रोल किया जावे । आधुनिक होते इस युग में जहाँ  मनुष्य केवल कमरे में बंद रहना चाहता है ।कई धनवान लोग अपने घरों में ऐसी मशीने लगा लेते हैं ।ये यंत्र मंनुष्य को यंत्रणा देकर शरीर का पसीना निकाल करअतिरिक्त ऊर्जा जला देते हैं।

 #मंत्र :-


जागकर जब हम अपने नित्य कर्म से
निव्रत हो सुबह ही आसन मुद्रा में या शांत
मुद्रा में बैठ जाना चाहिए । ऊपर वाले
का शुक्रिया अदा कर अपने जीवन की
जीवनदायिनी शक्ति अपनी बॉडी को
को स्वस्थ रखने हेतु   नित्य प्रति निम्न
कार्य करना चाहिए हमें यह बोलना चाहिए

 #में स्वस्थ हूँ
मैं स्वस्थ हूँ
मुझेयह मनुष्य जीवन  प्रभु ने दिया है

मुझे   इसे स्वस्थ रखना है ।

प्रकर्ति की समस्त शक्तियों को में नमन करता हूँ 

समस्त मेरे सर्वांगीण विकास में

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सहायता करें ।और पुनः जोर

जोर से बोले  में स्वस्थ हूँ ।मेरे

माता पिता तथा अपने सभी गुरुओं

का वंदन  करता हूँ। उनकी

कृपा में अवश्य चाहता हूं।

क्योंकि वे मनुष्य के

  नैसर्गिक सहयोगी हैं ।वे

आपको हमेशा ही सकारत्मकता

का संदेश देंगे । हमेशा ही आपका

सहयोग करेंगे ।

अच्छे स्वस्थ बनाये रखने के उपयोगी मंत्र

हमें अपने आपको हमेशा किसी भी प्रकार

के तनाव से दूर रखना है । किसी प्रकार की

नकारात्मकता से कोसों दूर रहना है ।

प्रातकाल जागकर ईस्वर आराधना

किसी भी शक्ति को याद करना मानव

को सकारात्मकता की ओर ले जाता है ।

मनुष्य चाहे नास्तिक और आस्तिक हों

दोनों के  लिए माता पिता सहयोगी मित्र

आदि वरदान की तरह हैं ।

रात को नीद आने से पहले दिन भर की

नकारात्मकता भूलने का प्रयास करे ।

एवम अच्छे कार्यों के लिए ईश्वर की दुनियां

में उपस्थित अच्छे लोगो  का धन्यवाद करो।

फिर मूल मंत्र को याद करो ।


में स्वस्थ हूँ

मुझे कोई बीमारी नहीं है ।

में पूर्ण स्वस्थ हूँ ।

I am healthy .

I have no disease .

I am absolutely healthy .



Now we r coming to third part of Fitness . If peoples follows these Jantra 's in their life than fitnessOf them not a problem.

# जंत्र:-

अब हम अपने शरीर की फिटनेस के तीसरे

और सबसे महत्व पूर्ण पहलू पर आते है ।जिसे

मेरे विचार से जंत्र कहना ठीक रहेगा ।ये

ही फिटनेस banaye rkhne ka सबसे

आसान एवम महत्वपूर्ण है ।अगर मंनुष्य

अपने जीवन में जंत्र मतलब जांचा परखा

सिद्ध उपाय


ब्रह्म मुहूर्त में  बिस्तर छोड़ देना  नींद त्याग जीवन चमत्कार ।


ब्रह्म मुहूर्त और सूर्योदय से पहले बिस्तर से उठना अति उत्तम ।


सूर्योदय के पश्चात बिस्तर छोड़ना जीवन फिटनेस धीरे धीरे समाप्त करना स्वास्थ्य को खराब करना ।


dant Dhawan दातुन टूथपेस्ट द्वारा अपने दांत मुंह  सफाई।


गरम पानी पीना अति उत्तम ।

 तांबा  बर्तन में रखा रात्रि का जल पान करना उत्तम स्वास्थ्यवर्धक।

 सुबह-सुबह पानी नहीं पीना बीमारियों को आमंत्रण।


उसके बाद  खुली जगह में धीरे-धीरे टहलना।

 इसके बाद शौच निवृति स्नान आदि शरीर के रोम छिद्रों को

साफ कर फिर दिन भर के लिए तैयार करना ।

ध्यान भजन पूजन नित्य नेम परमात्मा को याद करना जिसने हमें जन्म दिया है अति उत्तम ।

टीवी खोल लेना मोबाइल चलाना चाय कॉफी आदि पीकर बिस्तर पर ही पड़े रहना खराब स्वास्थ्य को आमंत्रण ।

आपकी फिटनैस का धीरे धीरे पतन की ओर।

 एक्सरसाइज करना व्यायाम करना दौड़ लगाना खेल खेलना आदि अति उत्तम ।

उसके बाद  पौष्टिक नाश्ता ब्रेकफास्ट कलेवा  कलेऊ सुबह 8:00 बजे के आसपास अति उत्तम perfact time उचित समय।

अगर कहीं काम पर निकलना है तो भोजन भी ले सकते हैं यह अति उत्तम है ।

इसके बाद आप अपने भरण-पोषण के लिए जो कार्य मिला है उसे अपनी तन्मयता से करें ।

 मध्यान्ह के पश्चात 1 बजे  या दो बजे भोजन करें भोजन कर थोड़ा आराम की मुद्रा में आये ,सोए नहीं नींद नहीं लेवे क्योंकि जब अंशुमाली भगवान सूर्य संसार में उपस्थित हैं नींद लेना हानिकारक है।

 15 मिनट बाद फिर से अपने कार्य करने लगें।अपना पूरा कार्य संध्या तक अवश्य समाप्त कर लें । तय काम पूरा होने  शान्ति मिलती है। यह अति उत्तम है।

अगर आवश्यकता है    शौच निवृत्ति करने के उपरांत  हाथ पैर धोकर  यह स्नान आदि करके  संध्या वंदन  करना चाहिए  यह उत्तम  विचार है  जीने का  सद मार्ग  है

जो स्वास्थ्यवर्धक  फिटनेस बनाए रखने वाला है। संध्या वंदन करने के पश्चात या हल्की एक्सरसाइज भी करना उत्तम है।

 अपना शाम का भोजन  गोधूलि बेला के बाद और पहले ले सकते हैं ।इससे आपको सोने से पहले पर्याप्त समय मिलेगा 3 घंटे या 4 घंटे मिल जाएंगे ।जिसमें आपका खाना अच्छी तरह वर पच सकेगा और शरीर के वांछित रस आपको मिलेंगे।

 यह आपके स्वास्थ्य को आपकी फिटनेस को उत्तम रूप से बनाए रखेंगे।

अगर आप खाना खाते ही सोते हैं यह सही नहीं त्यागने योग्य।

स्वास्थ्य और फिटनेस खराब करने वाला ।उपरोक्त जंत्र जीवन को चार चांद लगा देगें जिससे हमारा

शरीर स्वस्थ कांति शांति युक्त होगा ।और हम दीर्घायु होंगे।

 आपको कोई भी समस्या नहीं आएगी । यह उत्तम विचार  हैं ।

   मनुष्य के लिए यह सर्वोपरि होना चाहिए।

विस्तार पूर्वक व्याख्या क्या करने योग्य क्या नहीं करने योग्य मनुष्य को रात्रि को 10:00 बजे तक सो जाना चाहिए और शाम का भोजन यथा संभव हो सूर्य अस्त से पहले करना चाहिए ।आज की भागदौड़ वाली जिंदगी मैं हमारी दिनचर्या मैं बहुत ही भयंकर बदलाव आए हैं जैसे हम रातों को 12:00 बजे 1:02 बजे तक जागते रहते हैं। खाना खाकर सीधे बिस्तर देखते हैं  और फिर सुबह दस ग्यारह  बजे तक जगते नहीं हैँ।लोग दोपहर बाद तक जगते हैं खाना भी पच नहीं पाता है ।इसका कारण जो मनुष्य शरीर हमें प्रकृति ने दिया है उसका हम दुरुपयोग कर रहे हैं हमारे लिए सूर्योदय से पहले जगना अत्यंत जरूरी है । इससे हम अपना आहार-विहार को संतुलित कर पाते हैं जिससे हमारा शरीर जो प्रकर्ति परमेश्वर का उपहार है। उसका सामंजस्य प्रकर्ति के साथ बैठा सकते हैं।अगर हम ब्रह्म महूर्त यानी सुबह 4 बजे उठ जाते हैं । शौच आदि नित्य कर्म से निवृत होकर खुली हवा में  टहलने जाते हैं । तो हम प्रकर्ति से 100 प्रतिशत ले पाते हैं ।उस समय वातावरण  ऑक्सीजन से भरा होता है। और ऑक्सिजन हमारे स्वास्थ्य के लिए रामवाण है। इसके बाद दंत धावन स्नानादि कार्यों से निवृत होना चाहिए । वैसे तो ब्रह्ममहूर्त मैं जागकर निवर्त होने के बाद  मंजन तथा अंजन यानी स्नान कर लेना चाहिए ।इसके बाद पूजा पाठ आराधना अवश्य करना चाहिए।इससे मन हमेशा सकारत्मकता से सराबोर रहता है । शरीर की कसरत  मेहनत हल्की दौड़ व्यायाम योग स्नान के पश्चात अथवा स्नान के पहले  अपनी सुविधा अनुसार कर लेना चाहिए । इसे भी आदत बना लें । यह सब जो ऊपर बताया गया है फिटनेस जंत्र हैं।

मंनुष्य को अच्छा नाश्ता या खाना ले लेना चाहिए । क्योंकि

इस समय मंनुष्य की जठराग्नि बहुत तीव्र होती है। मंनुष्य की

ऊर्जा का स्रोत सूर्य को माना जाता है । सूर्य उदय होने से सूर्य

अस्त होने तक मानव के काम करने के लिए उपर्युक्त समय होता है।दिन में सोना हर तरह से त्याज्य है । अतः विशेष परिस्थिति में नीद दिन में लें ।अन्यथा त्याज्य करें । यह स्वस्थ व्यक्ति के पाचन तंत्र पर प्रभाव डालता है ।खाना खाने के करीब तीन घंटे तक तो नहीं  सोना चाहिए।
मनुष्य को दिन भर में 5 लीटर पानी पी लेना चाहिए क्यों हमारा शरीर जो पांच तत्वों से मिलकर बना है उसमें पानी की मात्रा सर्वाधिक है पानी हमारे शरीर में विजातीय  सब हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है यह शरीर की कार्यप्रणाली को  सक्रिय  रखता है ।
भोजन लेने के पश्चात करीब 2 घंटे तक हमें पानी का सेवन नहीं करना चाहिए क्यों ऐसा करने से हमारे अंदर जो भोजन गया है वह पच नहीं पाता हमारे शरीर के भीतर अग्नि क्रिया के द्वारा जो भोजन खाते हैं उससे उर्जा बनाई जाती है और उस ऊर्जा से हमारा शरीर चलता है अतः आदमी को भोजन के तुरंत बाद  पानी नहीं पीना चाहिए ।  

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